हिंदी नाम: अजमोदा, अजमुद, अजमोद
संस्कृत नाम: अजमोदा, अजमुदा, मर्कटी, दीपनी
अंग्रेज़ी नाम: Celery Seed, Wild Celery, Ajmoda
वानस्पतिक नाम: Apium graveolens L.
कुल (Family): Apiaceae (Umbelliferae)
अजमोदा आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण सुगंधित औषधीय एवं मसाला वनस्पति है। इसके बीज (Seeds) औषधीय उपयोग के लिए सबसे अधिक प्रयुक्त होते हैं। आयुर्वेद में अजमोदा को दीपन (भूख बढ़ाने वाला), पाचन (Digestive), वात-कफ शामक एवं मूत्रल (Diuretic) गुणों के लिए जाना जाता है। इसका उपयोग पाचन स्वास्थ्य, जोड़ों के स्वास्थ्य, मूत्र मार्ग के सामान्य कार्य तथा वात विकारों के समर्थन हेतु विभिन्न आयुर्वेदिक योगों में किया जाता है।
नोट: भारतीय आयुर्वेद में "अजमोदा" और "अजवाइन" अलग-अलग औषधीय पौधे हैं।
| भाषा | नाम |
|---|---|
| संस्कृत | अजमोदा, अजमुदा |
| हिंदी | अजमोदा, अजमुद |
| अंग्रेज़ी | Celery Seed, Wild Celery |
| मराठी | ओवा मोडा / अजमोदा |
| गुजराती | અજમોદ |
| बंगाली | আজমোদা |
| तमिल | அஜமோதா (Ajamoda) |
| तेलुगु | అజమోద (Ajamoda) |
| कन्नड़ | ಅಜಮೋದ (Ajamoda) |
| मलयालम | അജമോദ (Ajamoda) |
अजमोदा एक सुगंधित द्विवर्षीय (Biennial) शाकीय पौधा है, जिसकी ऊँचाई लगभग 30–100 सेमी तक होती है। इसकी पत्तियाँ हरी एवं खंडित होती हैं तथा छोटे सफेद फूल छत्र (Umbel) के रूप में लगते हैं। इसके छोटे भूरे रंग के बीज अत्यधिक सुगंधित होते हैं और औषधीय उपयोग के लिए सबसे अधिक प्रयुक्त किए जाते हैं।
अजमोदा के बीजों में निम्न प्रमुख जैव सक्रिय घटक पाए जाते हैं:
| गुण-धर्म | विवरण |
|---|---|
| रस | कटु, तिक्त |
| गुण | लघु, रूक्ष, तीक्ष्ण |
| वीर्य | उष्ण |
| विपाक | कटु |
| दोष प्रभाव | वात एवं कफ शामक |
आयुर्वेद में अजमोदा का उपयोग निम्न स्थितियों में वर्णित है:
अजमोदा पाचन अग्नि को प्रोत्साहित करने तथा सामान्य पाचन क्रिया के समर्थन में उपयोग की जाती है।
आयुर्वेद में इसे वातहर औषधि माना गया है, जो गैस एवं पेट फूलने जैसी समस्याओं के पारंपरिक प्रबंधन में उपयोगी मानी जाती है।
अजमोदा का उपयोग वातजन्य जोड़ों की असुविधा के समर्थन हेतु विभिन्न आयुर्वेदिक योगों में किया जाता है।
इसके मूत्रल (Diuretic) गुण सामान्य मूत्र प्रवाह के समर्थन में सहायक माने जाते हैं।
इसमें उपस्थित फ्लेवोनॉयड्स एवं पॉलीफेनॉल्स शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में योगदान दे सकते हैं।
कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में अजमोदा के जैव सक्रिय घटकों में सूजन-रोधी गुणों की संभावना देखी गई है।
महत्वपूर्ण: उपरोक्त लाभ पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोगों एवं उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार, निदान या रोकथाम का दावा नहीं माना जाना चाहिए।
उपलब्ध शोधों में अजमोदा के निम्न संभावित गुणों का अध्ययन किया गया है:
हालाँकि, इन प्रभावों की पुष्टि के लिए अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले मानव नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।
नहीं। अजमोदा (Apium graveolens) और अजवाइन (Trachyspermum ammi) दो अलग-अलग औषधीय पौधे हैं।
आयुर्वेद में इसका प्रमुख उपयोग पाचन शक्ति, वात संतुलन एवं मूत्र स्वास्थ्य के समर्थन में किया जाता है।
योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह एवं अनुशंसित मात्रा के अनुसार इसका नियमित सेवन किया जा सकता है।
हाँ। इसके बीजों का उपयोग मसाले एवं आयुर्वेदिक हर्बल फॉर्मूलेशन दोनों में किया जाता है।
यह जानकारी आयुर्वेदिक ग्रंथों, पारंपरिक उपयोगों तथा उपलब्ध वैज्ञानिक साहित्य के आधार पर केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी रोग के निदान, उपचार, रोकथाम या चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी औषधि का औषधीय उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।