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Giloy Satva (Tinospora cordifolia)

Code: H-009

 

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गिलोय सत्व (Guduchi Satva)

सामान्य परिचय

हिंदी नाम: गिलोय सत्व, गुडूची सत्व, अमृता सत्व
संस्कृत नाम: गुडूची सत्त्व, अमृता सत्त्व
अंग्रेज़ी नाम: Guduchi Satva, Giloy Starch, Guduchi Extracted Starch
वानस्पतिक नाम: Tinospora cordifolia (Willd.) Hook.f. & Thomson
कुल (Family): Menispermaceae

गिलोय सत्व (Guduchi Satva) गिलोय (Tinospora cordifolia) के परिपक्व तनों से पारंपरिक विधि द्वारा प्राप्त किया जाने वाला सफेद स्टार्चयुक्त (Starchy) सत्व है। यह गिलोय के तनों को पानी में भिगोकर, मथकर एवं छानकर प्राप्त किया जाता है, जिसके बाद नीचे जमा होने वाले शुद्ध स्टार्च को सुखाकर सत्व तैयार किया जाता है।

आयुर्वेद में गिलोय सत्व को रसायन (Rejuvenative), ज्वरघ्न, पित्तशामक, बल्य एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता के समर्थन हेतु उपयोगी माना गया है। यह सामान्य गिलोय चूर्ण की तुलना में अधिक शुद्ध एवं सुपाच्य रूप माना जाता है।

अन्य प्रचलित नाम

भाषा नाम
संस्कृत गुडूची सत्त्व, अमृता सत्त्व
हिंदी गिलोय सत्व
अंग्रेज़ी Guduchi Satva, Giloy Satva
मराठी गुळवेल सत्त्व
गुजराती ગળો સત્વ
बंगाली গুলঞ্চ সত্ত্ব
तमिल சீந்தில் சத்து
तेलुगु తిప్పతీగ సత్వం
कन्नड़ ಅಮೃತಬಳ್ಳಿ ಸತ್ವ
मलयालम ചിറ്റമൃത് സത്ത്വം

स्रोत एवं निर्माण प्रक्रिया

गिलोय सत्व गिलोय की परिपक्व बेल के तने से तैयार किया जाता है।

पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया:

  1. ताज़े गिलोय तनों को छोटे टुकड़ों में काटा जाता है।
  2. इन्हें स्वच्छ पानी में भिगोया जाता है।
  3. अच्छी तरह मसलकर एवं छानकर घोल तैयार किया जाता है।
  4. घोल को कुछ समय स्थिर रखा जाता है।
  5. नीचे बैठा सफेद स्टार्च (सत्व) अलग करके सुखाया जाता है।
  6. सूखने के बाद प्राप्त पाउडर को गिलोय सत्व कहा जाता है।

प्रमुख रासायनिक घटक (Active Constituents)

गिलोय सत्व में निम्न जैव सक्रिय घटक एवं पोषक तत्व पाए जा सकते हैं—

  • प्राकृतिक स्टार्च (Natural Starch)
  • Polysaccharides
  • Tinosporaside
  • Cordifolioside A
  • Diterpenoid Lactones
  • Glycosides
  • Alkaloids (अल्प मात्रा में)
  • Phenolic Compounds

नोट: गिलोय सत्व मुख्यतः स्टार्च-समृद्ध उत्पाद है, इसलिए इसमें गिलोय के कुछ अन्य सक्रिय घटकों की मात्रा चूर्ण या अर्क की तुलना में कम हो सकती है।

आयुर्वेदिक गुण-धर्म

गुण-धर्म विवरण
रस तिक्त, कषाय
गुण लघु, स्निग्ध
वीर्य उष्ण
विपाक मधुर
दोष प्रभाव त्रिदोषशामक (विशेषतः पित्त एवं कफ)

पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोग

आयुर्वेद में गिलोय सत्व का उपयोग निम्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है—

  • रसायन (Rejuvenative) योगों में
  • पित्त संतुलन के लिए
  • ज्वर संबंधी आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन में
  • सामान्य शक्ति एवं ऊर्जा के समर्थन हेतु
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता के समर्थन में
  • शरीर की पुनर्बलन (Recovery) संबंधी योगों में

संभावित स्वास्थ्य लाभ

1. रोग प्रतिरोधक क्षमता का समर्थन

गिलोय सत्व का उपयोग आयुर्वेद में प्रतिरक्षा प्रणाली के सामान्य कार्यों के समर्थन हेतु किया जाता है।

2. पित्त संतुलन

पारंपरिक रूप से इसका उपयोग पित्त दोष को संतुलित रखने वाले योगों में किया जाता है।

3. एंटीऑक्सीडेंट गुण

गिलोय से प्राप्त जैव सक्रिय यौगिक शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में सहायक हो सकते हैं।

4. सामान्य शक्ति एवं पुनर्बलन

गिलोय सत्व को शरीर की सामान्य शक्ति एवं स्वास्थ्य लाभ (Recovery) के समर्थन हेतु उपयोग किया जाता है।

5. आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन

यह विभिन्न आयुर्वेदिक चूर्ण, वटी एवं रसायन योगों का महत्वपूर्ण घटक है।

महत्वपूर्ण: उपरोक्त लाभ पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोगों एवं उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार, निदान या रोकथाम का दावा नहीं माना जाना चाहिए।

आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययन

Tinospora cordifolia पर उपलब्ध शोधों में निम्न संभावित गुणों का अध्ययन किया गया है—

  • Immunomodulatory Activity
  • Antioxidant Activity
  • Anti-inflammatory Activity
  • Hepatoprotective Potential
  • Adaptogenic Activity
  • Phytochemical Analysis

अधिकांश आधुनिक शोध गिलोय के सम्पूर्ण तने या उसके अर्क पर आधारित हैं। गिलोय सत्व पर विशेष मानव अध्ययनों की संख्या अपेक्षाकृत सीमित है।

उपयोग की विधियाँ

  • गिलोय सत्व पाउडर
  • शहद के साथ
  • गुनगुने पानी या दूध के साथ
  • आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन में

सामान्य मात्रा

  • गिलोय सत्व: 250–500 मि.ग्रा. दिन में 1–2 बार या चिकित्सक की सलाह अनुसार।

सावधानियाँ

  • चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही उपयोग करें।
  • गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।
  • यदि आप मधुमेह या प्रतिरक्षा तंत्र से संबंधित दवाएँ ले रहे हैं, तो उपयोग से पहले चिकित्सक से परामर्श करें।
  • केवल प्रमाणित एवं शुद्ध गुणवत्ता वाले उत्पाद का उपयोग करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

गिलोय सत्व क्या है?

गिलोय सत्व, गिलोय के तनों से पारंपरिक विधि द्वारा प्राप्त किया गया सफेद स्टार्चयुक्त अर्क (Starchy Extract) है।

क्या गिलोय सत्व और गिलोय चूर्ण एक जैसे हैं?

नहीं। गिलोय चूर्ण पूरे सूखे तने का पाउडर होता है, जबकि गिलोय सत्व तने से प्राप्त शुद्ध स्टार्चयुक्त अंश होता है।

गिलोय सत्व का मुख्य उपयोग क्या है?

आयुर्वेद में इसका उपयोग रसायन, पित्त संतुलन, सामान्य शक्ति एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता के समर्थन हेतु किया जाता है।

क्या गिलोय सत्व रोज़ लिया जा सकता है?

चिकित्सकीय सलाह एवं अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही इसका नियमित उपयोग करना चाहिए।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह जानकारी आयुर्वेदिक ग्रंथों, पारंपरिक उपयोगों तथा उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी रोग के निदान, उपचार, रोकथाम या चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि या हर्बल उत्पाद का उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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