हिंदी नाम: दूब, दुर्वा, हरियाली घास
संस्कृत नाम: दुर्वा, शतपर्वा, अनन्ता, गोलोमी, भार्गवी
अंग्रेज़ी नाम: Bermuda Grass, Bahama Grass, Devil's Grass, Durva Grass
वानस्पतिक नाम: Cynodon dactylon (L.) Pers.
कुल (Family): Poaceae (Gramineae)
दुर्वा (Cynodon dactylon) भारत की अत्यंत महत्वपूर्ण औषधीय एवं धार्मिक वनस्पतियों में से एक है। यह एक बहुवर्षीय रेंगने वाली घास है, जिसका उपयोग आयुर्वेद, सिद्ध एवं लोक चिकित्सा में प्राचीन काल से किया जाता रहा है। आयुर्वेद में मुख्य रूप से संपूर्ण पंचांग (Whole Plant) का औषधीय उपयोग किया जाता है।
दुर्वा को आयुर्वेद में शीतल, रक्तस्तंभक (रक्तस्राव रोकने में सहायक), पित्तशामक, मूत्रल, व्रणरोपण एवं रक्तशोधक गुणों वाला माना गया है। इसका उल्लेख चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, भावप्रकाश निघण्टु, धन्वंतरि निघण्टु एवं राज निघण्टु सहित अनेक आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है।
| भाषा | नाम |
|---|---|
| संस्कृत | दुर्वा, शतपर्वा, अनन्ता |
| हिंदी | दूब, दुर्वा |
| अंग्रेज़ी | Bermuda Grass, Durva Grass |
| मराठी | दुर्वा |
| गुजराती | ધરો (Dharo) |
| बंगाली | দূর্বা (Durba) |
| तमिल | அறுகம்புல் (Arugampul) |
| तेलुगु | గరిక (Garika) |
| कन्नड़ | ಗರಿಕೆ (Garike) |
| मलयालम | കരുക (Karuka) |
दुर्वा एक बहुवर्षीय, तेजी से फैलने वाली हरी घास है, जिसकी लंबी रेंगने वाली शाखाएँ (Stolons) भूमि पर फैलती हैं। इसकी जड़ें मजबूत होती हैं और यह विभिन्न प्रकार की जलवायु में आसानी से उग जाती है। धार्मिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है तथा भगवान गणेश की पूजा में इसका उपयोग किया जाता है।
दुर्वा में निम्न प्रमुख जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं—
| गुणधर्म | विवरण |
|---|---|
| रस | कषाय, तिक्त, मधुर |
| गुण | लघु, रुक्ष |
| वीर्य | शीत |
| विपाक | मधुर |
| दोष प्रभाव | पित्त एवं रक्तदोष शामक |
आयुर्वेद में दुर्वा का उपयोग निम्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है—
आयुर्वेद में दुर्वा का उपयोग रक्तस्राव की स्थितियों के समर्थन हेतु पारंपरिक रूप से किया जाता है।
दुर्वा को मूत्रल (Diuretic) माना गया है तथा इसका उपयोग मूत्र तंत्र के सामान्य स्वास्थ्य के समर्थन हेतु किया जाता है।
दुर्वा का उपयोग त्वचा को शांत रखने एवं बाह्य हर्बल लेप में पारंपरिक रूप से किया जाता है।
इसमें उपस्थित फ्लेवोनॉयड्स एवं फिनोलिक यौगिक कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में सहायक हो सकते हैं।
आयुर्वेद में दुर्वा का उपयोग व्रण (घाव) की देखभाल हेतु बाह्य रूप से पारंपरिक योगों में किया जाता है।
महत्वपूर्ण: उपरोक्त लाभ आयुर्वेदिक परंपराओं एवं उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार, निदान या रोकथाम का दावा नहीं माना जाना चाहिए।
Cynodon dactylon पर उपलब्ध शोधों में निम्न संभावित गुणों का अध्ययन किया गया है—
इन संभावित प्रभावों की पुष्टि के लिए अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले मानव नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।
मुख्य रूप से संपूर्ण पौधा (Whole Plant / Panchang) उपयोग किया जाता है।
हाँ। दुर्वा भगवान गणेश की पूजा में अत्यंत शुभ एवं पवित्र मानी जाती है।
हाँ। आयुर्वेद में इसका उपयोग बाह्य लेप एवं हर्बल त्वचा देखभाल फॉर्मूलेशन में किया जाता है।
हाँ। ताज़ा दुर्वा का स्वरस कई पारंपरिक आयुर्वेदिक योगों में उपयोग किया जाता है।
दुर्वा (Cynodon dactylon) – फायदे, उपयोग, गुण एवं Botanical Name
दुर्वा (Cynodon dactylon) की संपूर्ण जानकारी, आयुर्वेदिक गुण, सक्रिय घटक, रक्तस्राव, मूत्र एवं त्वचा स्वास्थ्य में पारंपरिक उपयोग, मात्रा, सावधानियाँ एवं FAQ।
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यह जानकारी आयुर्वेदिक ग्रंथों, पारंपरिक उपयोगों तथा उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी रोग के निदान, उपचार, रोकथाम या चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि या हर्बल उत्पाद का उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।