हिंदी नाम: नागकेसर, नागकेशर
संस्कृत नाम: नागकेसर, नागपुष्प, केसर, गजपुष्प
अंग्रेज़ी नाम: Ceylon Ironwood, Indian Rose Chestnut, Cobra's Saffron
वानस्पतिक नाम: Mesua ferrea L.
कुल (Family): Calophyllaceae (पूर्व वर्गीकरण: Clusiaceae/Guttiferae)
नागकेसर (Mesua ferrea) एक सदाबहार, सुगंधित एवं अत्यंत मूल्यवान औषधीय वृक्ष है। आयुर्वेद में मुख्य रूप से इसके सूखे पुंकेसर (Dried Stamens/Flower Stamens) का औषधीय उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त बीज, बीज का तेल, छाल एवं पुष्प भी विभिन्न पारंपरिक उपयोगों में प्रयुक्त होते हैं।
आयुर्वेद में नागकेसर को रक्तस्तंभक, दीपनीय, पाचनवर्धक, ग्राही, पित्तशामक एवं वर्ण्य (त्वचा के लिए हितकारी) माना गया है। इसका उल्लेख चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदय, भावप्रकाश निघण्टु, धन्वंतरि निघण्टु एवं भैषज्य रत्नावली सहित अनेक आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है। यह च्यवनप्राश, विभिन्न आयुर्वेदिक चूर्णों एवं रसायन योगों का भी महत्वपूर्ण घटक है।
| भाषा | नाम |
|---|---|
| संस्कृत | नागकेसर, नागपुष्प |
| हिंदी | नागकेसर |
| अंग्रेज़ी | Ceylon Ironwood, Indian Rose Chestnut |
| मराठी | नागकेशर |
| गुजराती | નાગકેસર |
| बंगाली | নাগকেশর (Nagkeshar) |
| तमिल | நாகப்பூ (Nagappoo) |
| तेलुगु | నాగకేసరము (Nagakesaramu) |
| कन्नड़ | ನಾಗಕೇಸರಿ (Nagakesari) |
| मलयालम | നാഗകേസരം (Nagakesaram) |
नागकेसर एक सुंदर सदाबहार वृक्ष है, जिसकी ऊँचाई 15–30 मीटर तक हो सकती है। इसके फूल सफेद रंग के होते हैं तथा मध्य भाग में सुनहरे-पीले रंग के अनेक पुंकेसर होते हैं। इन्हीं सूखे पुंकेसरों को बाज़ार में नागकेसर के नाम से बेचा जाता है। इसे केसर (Crocus sativus) से भ्रमित नहीं करना चाहिए।
नागकेसर में निम्न प्रमुख जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं—
| गुणधर्म | विवरण |
|---|---|
| रस | कषाय, तिक्त |
| गुण | लघु, रुक्ष |
| वीर्य | शीत |
| विपाक | कटु |
| दोष प्रभाव | पित्त एवं कफ शामक |
आयुर्वेद में नागकेसर का उपयोग निम्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है—
आयुर्वेद में नागकेसर का उपयोग पाचन अग्नि के समर्थन एवं सामान्य पाचन स्वास्थ्य बनाए रखने हेतु किया जाता है।
नागकेसर का उल्लेख आयुर्वेदिक ग्रंथों में रक्तस्राव संबंधी पारंपरिक योगों के एक घटक के रूप में मिलता है।
नागकेसर का उपयोग प्राकृतिक स्किनकेयर एवं आयुर्वेदिक सौंदर्य उत्पादों में किया जाता है।
इसमें उपस्थित फ्लेवोनॉयड्स एवं फिनोलिक यौगिक कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में सहायक हो सकते हैं।
नागकेसर का उपयोग च्यवनप्राश, अवलेह, चूर्ण एवं अन्य पारंपरिक आयुर्वेदिक योगों में किया जाता है।
महत्वपूर्ण: उपरोक्त लाभ पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोगों एवं उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार, निदान या रोकथाम का दावा नहीं माना जाना चाहिए।
Mesua ferrea पर उपलब्ध शोधों में निम्न संभावित गुणों का अध्ययन किया गया है—
इन संभावित प्रभावों की पुष्टि के लिए अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले मानव नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।
मुख्य रूप से सूखे पुष्पों के पुंकेसर (Dried Stamens) का उपयोग किया जाता है।
नहीं। नागकेसर (Mesua ferrea) और केसर (Crocus sativus) दो अलग-अलग वनस्पतियाँ हैं।
हाँ। नागकेसर कई पारंपरिक आयुर्वेदिक योगों, जिनमें च्यवनप्राश भी शामिल है, का एक महत्वपूर्ण घटक है।
हाँ। इसका उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक एवं हर्बल स्किनकेयर उत्पादों में किया जाता है।
नागकेसर (Mesua ferrea) – फायदे, उपयोग, गुण एवं Botanical Name
नागकेसर (Mesua ferrea) की संपूर्ण जानकारी, आयुर्वेदिक गुण, सक्रिय घटक, पाचन एवं त्वचा स्वास्थ्य में पारंपरिक उपयोग, मात्रा, सावधानियाँ एवं FAQ।
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यह जानकारी आयुर्वेदिक ग्रंथों, पारंपरिक उपयोगों तथा उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी रोग के निदान, उपचार, रोकथाम या चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि या हर्बल उत्पाद का उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।