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Bhumi Amla (Phyllanthus niruri)

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भुई आँवला (Bhumi Amla)

1. सामान्य परिचय

हिंदी नाम: भुई आँवला, भूई आँवला, भूम्यामलकी
संस्कृत नाम: भूम्यामलकी, बहुफला, तमालकी
अंग्रेज़ी नाम: Stonebreaker, Gale of the Wind, Seed-under-Leaf, Bhumi Amla
वानस्पतिक नाम: Phyllanthus niruri L. (कुछ क्षेत्रों में Phyllanthus amarus Schumach. & Thonn. का भी समान रूप से उपयोग किया जाता है।)
कुल (Family): Phyllanthaceae

भुई आँवला (Phyllanthus niruri) आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पति है, जिसे विशेष रूप से यकृत (Liver) स्वास्थ्य, मूत्र प्रणाली (Urinary System) एवं पाचन स्वास्थ्य के समर्थन हेतु पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद में इसे पित्तशामक, मूत्रल (Diuretic), यकृत-हितकारी, दीपनीय एवं रसायन गुणों वाली औषधि माना गया है।

भुई आँवला का उल्लेख भावप्रकाश निघण्टु, धन्वंतरि निघण्टु, भैषज्य रत्नावली, शार्ङ्गधर संहिता तथा अन्य आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है। इसका उपयोग चूर्ण, स्वरस, क्वाथ, अर्क एवं बहु-हर्बल आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन में किया जाता है।

2. अन्य प्रचलित नाम

भाषा नाम
संस्कृत भूम्यामलकी, तमालकी
हिंदी भुई आँवला
अंग्रेज़ी Stonebreaker, Seed-under-Leaf
मराठी भुईआवळा
गुजराती ભૂઈ આમળા
बंगाली ভূই আমলকি
तमिल கீழாநெல்லி (Keezhanelli)
तेलुगु నేల ఉసిరి (Nela Usiri)
कन्नड़ ನೆಲನಳ್ಳಿ (Nelanelli)
मलयालम കീഴാർനെല്ലി (Keezharnelli)

3. पौधे का परिचय

भुई आँवला एक छोटा, एकवर्षीय शाकीय पौधा है जिसकी ऊँचाई लगभग 20–60 सेमी होती है। इसकी शाखाओं के नीचे छोटे-छोटे गोल फल लगते हैं, जिससे इसे अंग्रेज़ी में Seed-under-Leaf भी कहा जाता है। औषधीय उपयोग के लिए मुख्यतः संपूर्ण पंचांग (Whole Plant) का उपयोग किया जाता है।

4. प्राकृतिक वितरण एवं खेती

  • मूल क्षेत्र: भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया एवं उष्णकटिबंधीय क्षेत्र
  • भारत में वितरण: लगभग सम्पूर्ण भारत
  • उपयुक्त जलवायु: उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय
  • तापमान: 20–35°C
  • मिट्टी: नम, उपजाऊ एवं अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी

5. उपयोगी भाग (Parts Used)

  • संपूर्ण पंचांग (Whole Plant) – मुख्य औषधीय भाग
  • पत्तियाँ (Leaves)
  • जड़ (Root)
  • फल (Fruit)

6. प्रमुख रासायनिक घटक (Active Constituents)

भुई आँवला में निम्न प्रमुख जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं—

  • Phyllanthin
  • Hypophyllanthin
  • Niranthin
  • Nirurin
  • Lignans
  • Flavonoids
  • Tannins
  • Ellagic Acid
  • Gallic Acid
  • Polyphenols

7. आयुर्वेदिक गुणधर्म

गुणधर्म विवरण
रस तिक्त, कषाय
गुण लघु, रुक्ष
वीर्य शीत
विपाक मधुर
दोष प्रभाव पित्त एवं कफ शामक

8. पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोग

आयुर्वेद में भुई आँवला का उपयोग निम्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है—

  • यकृत स्वास्थ्य संबंधी पारंपरिक फॉर्मूलेशन में
  • मूत्र स्वास्थ्य संबंधी आयुर्वेदिक योगों में
  • पाचन समर्थन हेतु हर्बल तैयारियों में
  • चूर्ण एवं क्वाथ निर्माण में
  • स्वरस एवं अर्क के रूप में
  • बहु-हर्बल आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन में

9. संभावित स्वास्थ्य लाभ

1. यकृत (Liver) स्वास्थ्य का समर्थन

भुई आँवला का उपयोग आयुर्वेद में यकृत के सामान्य स्वास्थ्य के समर्थन हेतु विभिन्न पारंपरिक योगों में किया जाता है।

2. मूत्र प्रणाली का समर्थन

इसे पारंपरिक रूप से मूत्रल (Diuretic) गुणों के कारण मूत्र स्वास्थ्य संबंधी आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन में सम्मिलित किया जाता है।

3. पाचन स्वास्थ्य का समर्थन

भुई आँवला का उपयोग पाचन अग्नि एवं सामान्य पाचन स्वास्थ्य के समर्थन हेतु किया जाता है।

4. एंटीऑक्सीडेंट गुण

इसमें उपस्थित Phyllanthin, Flavonoids एवं Polyphenols कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में सहायक हो सकते हैं।

5. रसायन (Rejuvenative) उपयोग

आयुर्वेद में इसे विभिन्न रसायन एवं बहु-हर्बल योगों में सम्मिलित किया जाता है।

महत्वपूर्ण: उपरोक्त लाभ पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोगों एवं उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार, निदान या रोकथाम का दावा नहीं माना जाना चाहिए।

10. आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययन

Phyllanthus niruri पर उपलब्ध शोधों में निम्न संभावित गुणों का अध्ययन किया गया है—

  • Hepatoprotective Activity
  • Antioxidant Activity
  • Anti-inflammatory Activity
  • Nephroprotective Potential
  • Antimicrobial Activity
  • Immunomodulatory Potential
  • Phytochemical Analysis

इन संभावित प्रभावों की पुष्टि के लिए अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले मानव नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।

11. उपयोग की विधियाँ

  • भुई आँवला चूर्ण
  • स्वरस (Fresh Juice)
  • क्वाथ (काढ़ा)
  • मानकीकृत अर्क (Standardized Extract)
  • हर्बल कैप्सूल
  • बहु-हर्बल आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन

12. सामान्य मात्रा

  • चूर्ण: 3–6 ग्राम प्रतिदिन (चिकित्सकीय सलाह अनुसार)
  • स्वरस: 10–20 मि.ली.
  • काढ़ा: 30–50 मि.ली.
  • अर्क (Extract): उत्पाद के निर्देशानुसार

13. सावधानियाँ

  • केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से उपयोग करें।
  • गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान उपयोग से पहले चिकित्सकीय परामर्श लें।
  • यदि आप मधुमेह या रक्तचाप की दवाएँ ले रहे हैं, तो उपयोग से पहले चिकित्सक से सलाह लें।
  • निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन न करें।
  • केवल प्रमाणित एवं शुद्ध गुणवत्ता वाले उत्पादों का उपयोग करें।

14. भंडारण

  • ठंडी एवं सूखी जगह पर रखें।
  • नमी एवं सीधी धूप से बचाएँ।
  • एयरटाइट कंटेनर में संग्रहित करें।

15. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

भुई आँवला का कौन-सा भाग औषधीय उपयोग में आता है?

मुख्य रूप से संपूर्ण पंचांग (Whole Plant) का उपयोग किया जाता है।

भुई आँवला में कौन-से प्रमुख सक्रिय घटक पाए जाते हैं?

इसमें Phyllanthin, Hypophyllanthin, Niranthin, Flavonoids एवं Ellagic Acid प्रमुख जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं।

क्या भुई आँवला केवल यकृत स्वास्थ्य के लिए उपयोग किया जाता है?

नहीं। आयुर्वेद में इसका उपयोग यकृत, मूत्र एवं पाचन स्वास्थ्य के समर्थन हेतु विभिन्न पारंपरिक फॉर्मूलेशन में किया जाता है।

क्या भुई आँवला का उपयोग लंबे समय तक किया जा सकता है?

लंबे समय तक उपयोग केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही करना चाहिए।

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भुई आँवला (Phyllanthus niruri) – फायदे, उपयोग, गुण एवं Botanical Name

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अस्वीकरण (Disclaimer)

यह जानकारी आयुर्वेदिक ग्रंथों, पारंपरिक उपयोगों तथा उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी रोग के निदान, उपचार, रोकथाम या चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि, हर्बल सप्लीमेंट या प्राकृतिक उत्पाद का उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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