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Gambhari Bark (Gmelina arborea) whole

Code: HB-006

 

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गम्भारी छाल (Gambhari Bark)

सामान्य परिचय

हिंदी नाम: गम्भारी, गम्भार, गम्हार
संस्कृत नाम: गम्भारी, श्रीपर्णी, काश्मरी
अंग्रेज़ी नाम: Gambhari, Beechwood, White Teak
वानस्पतिक नाम: Gmelina arborea Roxb.
कुल (Family): Lamiaceae (पूर्व में Verbenaceae)

गम्भारी (Gmelina arborea) आयुर्वेद की प्रसिद्ध दशमूल (Dashamoola) औषधियों में सम्मिलित एक महत्वपूर्ण वृक्ष है। इसकी छाल (Bark), जड़, फल, पत्तियाँ एवं पुष्प औषधीय रूप से उपयोग किए जाते हैं। विशेष रूप से गम्भारी की छाल का उपयोग अनेक आयुर्वेदिक क्वाथ, चूर्ण एवं पारंपरिक फॉर्मूलेशन में किया जाता है।

आयुर्वेद में गम्भारी को बल्य (शक्ति प्रदान करने वाली), बृंहण, रसायन, वात-पित्त शामक, शोथहर एवं ज्वरहर गुणों वाली औषधि माना गया है। इसका उल्लेख चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदयम्, भावप्रकाश निघण्टु एवं धन्वंतरि निघण्टु सहित अनेक आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है।

अन्य प्रचलित नाम

भाषा नाम
संस्कृत गम्भारी, श्रीपर्णी, काश्मरी
हिंदी गम्भारी, गम्हार
अंग्रेज़ी Gambhari, White Teak, Beechwood
मराठी शिवण
गुजराती સેવણ
बंगाली গামার (Gamar)
तमिल குமிழ் (Kumil)
तेलुगु గుమ్మడి చెట్టు (Gummadi Chettu)
कन्नड़ ಶಿವಣೆ (Shivane)
मलयालम കുമിഴ് (Kumizh)

पौधे का परिचय

गम्भारी एक मध्यम से बड़ा पर्णपाती वृक्ष है, जिसकी ऊँचाई 15–30 मीटर तक हो सकती है। इसकी छाल धूसर-भूरे रंग की होती है तथा पत्तियाँ बड़ी एवं हृदयाकार होती हैं। पीले रंग के आकर्षक फूल और अंडाकार फल इसकी प्रमुख पहचान हैं।

 

प्रमुख रासायनिक घटक (Active Constituents)

गम्भारी की छाल में निम्न प्रमुख जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं—

  • Lignans
  • Iridoid Glycosides
  • Apigenin
  • Luteolin
  • Quercetin
  • Flavonoids
  • Phenolic Compounds
  • Tannins
  • Sterols
  • Saponins

आयुर्वेदिक गुण-धर्म

गुण-धर्म विवरण
रस मधुर, तिक्त, कषाय
गुण गुरु, स्निग्ध
वीर्य शीत
विपाक मधुर
दोष प्रभाव वात एवं पित्त शामक

पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोग

आयुर्वेद में गम्भारी की छाल का उपयोग निम्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है—

  • दशमूल क्वाथ एवं अन्य दशमूल योगों में
  • बल्य एवं बृंहण फॉर्मूलेशन में
  • वात विकारों के पारंपरिक योगों में
  • ज्वर संबंधी आयुर्वेदिक तैयारियों में
  • शोथ (सूजन) संबंधी पारंपरिक योगों में
  • प्रसवोत्तर (Postpartum) देखभाल संबंधी आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन में

संभावित स्वास्थ्य लाभ

1. वात संतुलन

आयुर्वेद में गम्भारी को वात दोष के संतुलन हेतु दशमूल समूह की प्रमुख औषधि माना गया है।

2. सूजन संबंधी समर्थन

पारंपरिक रूप से गम्भारी का उपयोग सूजन (Inflammation) से संबंधित आयुर्वेदिक योगों में किया जाता है। कुछ प्रारंभिक अध्ययनों में इसके सूजन-रोधी गुणों का भी अध्ययन किया गया है।

3. एंटीऑक्सीडेंट गुण

गम्भारी की छाल में उपस्थित फ्लेवोनॉयड्स एवं फिनोलिक यौगिक कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में सहायक हो सकते हैं।

4. सामान्य शक्ति एवं पोषण

आयुर्वेद में इसे बल्य एवं बृंहण औषधि माना गया है, जो शरीर की सामान्य शक्ति एवं पोषण के समर्थन हेतु उपयोग की जाती है।

5. आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन

गम्भारी की छाल दशमूल चूर्ण, दशमूल क्वाथ एवं अन्य क्लासिकल आयुर्वेदिक योगों में प्रमुख घटक के रूप में प्रयुक्त होती है।

महत्वपूर्ण: उपरोक्त लाभ पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोगों एवं उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार, निदान या रोकथाम का दावा नहीं माना जाना चाहिए।

आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययन

Gmelina arborea पर उपलब्ध शोधों में निम्न संभावित गुणों का अध्ययन किया गया है—

  • Antioxidant Activity
  • Anti-inflammatory Activity
  • Hepatoprotective Potential
  • Antimicrobial Activity
  • Analgesic Potential
  • Phytochemical Analysis

इन संभावित प्रभावों की पुष्टि के लिए अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले मानव नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।

सामान्य मात्रा

  • चूर्ण: 3–6 ग्राम प्रतिदिन
  • काढ़ा (क्वाथ): 30–50 मि.ली.
  • अर्क (Extract): उत्पाद या चिकित्सकीय सलाह अनुसार

सावधानियाँ

  • चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही उपयोग करें।
  • गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।
  • अनुशंसित मात्रा से अधिक सेवन न करें।
  • केवल प्रमाणित एवं शुद्ध गुणवत्ता वाले हर्बल उत्पादों का उपयोग करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

गम्भारी किस आयुर्वेदिक समूह की औषधि है?

गम्भारी दशमूल (Dashamoola) समूह की प्रमुख औषधियों में से एक है।

गम्भारी का कौन-सा भाग सबसे अधिक उपयोग किया जाता है?

मुख्य रूप से छाल (Bark) और जड़ (Root) औषधीय उपयोग में ली जाती हैं।

क्या गम्भारी सूजन संबंधी आयुर्वेदिक योगों में उपयोग की जाती है?

हाँ। पारंपरिक आयुर्वेद में इसका उपयोग सूजन एवं वात संबंधी योगों में किया जाता है।

क्या गम्भारी आधुनिक हर्बल उत्पादों में भी उपयोग होती है?

हाँ। इसके अर्क एवं चूर्ण का उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक एवं हर्बल फॉर्मूलेशन में किया जाता है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह जानकारी आयुर्वेदिक ग्रंथों, पारंपरिक उपयोगों तथा उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी रोग के निदान, उपचार, रोकथाम या चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि या हर्बल उत्पाद का उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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