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Parijat / Harsingar Leaf (Nyctanthes arbor-tristis)

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पारिजात / हरसिंगार पत्ती (Parijat / Harsingar Leaf)

1. सामान्य परिचय

हिंदी नाम: पारिजात, हरसिंगार, शिउली
संस्कृत नाम: पारिजात, शैफालिका, शैफालि, रात्रिपुष्पा
अंग्रेज़ी नाम: Night-flowering Jasmine Leaf, Coral Jasmine Leaf, Tree of Sorrow Leaf
वानस्पतिक नाम: Nyctanthes arbor-tristis L.
कुल (Family): Oleaceae

पारिजात (Nyctanthes arbor-tristis) एक प्रसिद्ध औषधीय एवं सुगंधित वृक्ष है। आयुर्वेद में इसकी पत्तियाँ (Leaves) सबसे अधिक औषधीय महत्व रखती हैं। इनके अतिरिक्त पुष्प, बीज एवं छाल का भी उपयोग किया जाता है। पारिजात की पत्तियों का उल्लेख प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में ज्वरघ्न (ज्वर में उपयोगी), वातहर, कृमिघ्न, शोथहर एवं कफहर गुणों के लिए किया गया है।

इसका वर्णन चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदय, भावप्रकाश निघण्टु, धन्वंतरि निघण्टु एवं भैषज्य रत्नावली सहित अनेक आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है। आधुनिक हर्बल अनुसंधानों में भी इसकी पत्तियों पर व्यापक अध्ययन किए गए हैं।

2. अन्य प्रचलित नाम

भाषा नाम
संस्कृत पारिजात, शैफालिका
हिंदी हरसिंगार, पारिजात
अंग्रेज़ी Night-flowering Jasmine
मराठी पारिजातक
गुजराती પારિજાત
बंगाली শিউলি (Shiuli)
तमिल பவழமல்லி (Pavazhamalli)
तेलुगु పారిజాతం (Parijatam)
कन्नड़ ಪಾರಿಜಾತ (Parijata)
मलयालम പവിഴമല്ലി (Pavizhamalli)

3. पौधे का परिचय

पारिजात एक मध्यम आकार का पर्णपाती वृक्ष है, जिसकी ऊँचाई लगभग 5–10 मीटर तक होती है। इसकी पत्तियाँ गहरे हरे रंग की, खुरदरी एवं अंडाकार होती हैं। फूल रात्रि में खिलते हैं और प्रातःकाल झड़ जाते हैं। औषधीय दृष्टि से इसकी पत्तियाँ सबसे अधिक उपयोगी मानी जाती हैं।

4. प्राकृतिक वितरण एवं खेती

  • मूल क्षेत्र: दक्षिण एशिया
  • भारत में वितरण: सम्पूर्ण भारत
  • उपयुक्त जलवायु: उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय
  • तापमान: 20–35°C
  • मिट्टी: अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी

5. उपयोगी भाग (Parts Used)

  • पत्तियाँ (Leaves) – मुख्य औषधीय भाग
  • पुष्प (Flowers)
  • बीज (Seeds)
  • छाल (Bark)

6. प्रमुख रासायनिक घटक (Active Constituents)

पारिजात की पत्तियों में निम्न प्रमुख जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं—

  • Iridoid Glycosides (Nyctanthoside)
  • Arbortristosides (A, B, C)
  • Nyctanthic Acid
  • Flavonoids
  • Phenolic Compounds
  • Tannins
  • β-Sitosterol
  • Oleanolic Acid

7. आयुर्वेदिक गुणधर्म

गुणधर्म विवरण
रस तिक्त, कषाय
गुण लघु, रुक्ष
वीर्य उष्ण
विपाक कटु
दोष प्रभाव वात एवं कफ शामक

8. पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोग

आयुर्वेद में पारिजात की पत्तियों का उपयोग निम्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है—

  • ज्वर संबंधी पारंपरिक आयुर्वेदिक योगों में
  • वात संबंधी आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन में
  • जोड़ों एवं मांसपेशियों के स्वास्थ्य समर्थन हेतु पारंपरिक योगों में
  • त्वचा स्वास्थ्य संबंधी हर्बल उत्पादों में
  • हर्बल चूर्ण, क्वाथ एवं अर्क निर्माण में
  • प्रतिरक्षा समर्थन हेतु बहु-हर्बल फॉर्मूलेशन में

9. संभावित स्वास्थ्य लाभ

1. जोड़ों एवं मांसपेशियों के स्वास्थ्य का समर्थन

आयुर्वेद में पारिजात की पत्तियों का उपयोग जोड़ों की आरामदायक गतिशीलता एवं वात संतुलन के लिए पारंपरिक रूप से किया जाता है।

2. ज्वर संबंधी पारंपरिक उपयोग

आयुर्वेदिक ग्रंथों में पारिजात पत्तियों का उल्लेख ज्वर संबंधी विभिन्न पारंपरिक योगों में मिलता है।

3. प्रतिरक्षा स्वास्थ्य का समर्थन

इसके जैव सक्रिय यौगिक शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली के समर्थन में सहायक हो सकते हैं।

4. एंटीऑक्सीडेंट गुण

पत्तियों में उपस्थित फ्लेवोनॉयड्स एवं फिनोलिक यौगिक कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में सहायक हो सकते हैं।

5. त्वचा स्वास्थ्य

पारिजात पत्ती का उपयोग कुछ हर्बल स्किनकेयर एवं आयुर्वेदिक त्वचा संबंधी उत्पादों में किया जाता है।

महत्वपूर्ण: उपरोक्त लाभ पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोगों एवं उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार, निदान या रोकथाम का दावा नहीं माना जाना चाहिए।

10. आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययन

Nyctanthes arbor-tristis की पत्तियों पर उपलब्ध शोधों में निम्न संभावित गुणों का अध्ययन किया गया है—

  • Anti-inflammatory Activity
  • Antioxidant Activity
  • Immunomodulatory Potential
  • Antimicrobial Activity
  • Hepatoprotective Potential
  • Antipyretic Potential
  • Phytochemical Analysis

इन संभावित प्रभावों की पुष्टि के लिए अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले मानव नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।

11. उपयोग की विधियाँ

  • पारिजात पत्ती चूर्ण
  • क्वाथ (काढ़ा)
  • मानकीकृत अर्क (Standardized Extract)
  • हर्बल कैप्सूल
  • बहु-हर्बल आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन

12. सामान्य मात्रा

  • चूर्ण: 2–5 ग्राम प्रतिदिन (चिकित्सकीय सलाह अनुसार)
  • काढ़ा: 30–50 मि.ली.
  • अर्क (Extract): उत्पाद के निर्देशानुसार

13. सावधानियाँ

  • केवल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपयोग करें।
  • गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान उपयोग से पहले विशेषज्ञ से परामर्श लें।
  • निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन न करें।
  • यदि किसी प्रकार की एलर्जी या असुविधा हो तो उपयोग बंद करें।
  • केवल प्रमाणित एवं शुद्ध गुणवत्ता वाले कच्चे माल का उपयोग करें।

14. भंडारण

  • ठंडी एवं सूखी जगह पर रखें।
  • नमी एवं सीधी धूप से बचाएँ।
  • एयरटाइट कंटेनर में संग्रहित करें।

15. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

पारिजात का सबसे अधिक औषधीय उपयोग किस भाग का होता है?

आयुर्वेद में पत्तियाँ (Leaves) सबसे अधिक औषधीय महत्व रखती हैं।

क्या पारिजात की पत्तियाँ जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए उपयोग की जाती हैं?

हाँ। आयुर्वेद में इनका उपयोग वात एवं जोड़ों के स्वास्थ्य समर्थन संबंधी पारंपरिक योगों में किया जाता है।

क्या पारिजात की पत्तियों का उपयोग ज्वर संबंधी आयुर्वेदिक योगों में होता है?

हाँ। पारंपरिक आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसका उल्लेख ज्वर संबंधी कई योगों में मिलता है।

क्या पारिजात और हरसिंगार एक ही पौधा हैं?

हाँ। पारिजात और हरसिंगार Nyctanthes arbor-tristis के ही सामान्य नाम हैं।

16. SEO Meta Title

पारिजात / हरसिंगार पत्ती (Nyctanthes arbor-tristis) – फायदे, उपयोग, गुण एवं Botanical Name

17. SEO Meta Description

पारिजात (Nyctanthes arbor-tristis) पत्ती की संपूर्ण जानकारी, आयुर्वेदिक गुण, सक्रिय घटक, जोड़ों एवं प्रतिरक्षा स्वास्थ्य में पारंपरिक उपयोग, मात्रा, सावधानियाँ एवं FAQ।

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अस्वीकरण (Disclaimer)

यह जानकारी आयुर्वेदिक ग्रंथों, पारंपरिक उपयोगों तथा उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी रोग के निदान, उपचार, रोकथाम या चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि, हर्बल सप्लीमेंट या प्राकृतिक उत्पाद का उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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