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Nishoth Powder (Operculina turpethum)

Code: HP-018

 

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निशोथ (Nishoth)

1. सामान्य परिचय

हिंदी नाम: निशोथ, निशोत, त्रिवृत, तुरपिथ
संस्कृत नाम: त्रिवृत, श्वेत त्रिवृत, श्यामा, निशोथ, त्रिपुटा
अंग्रेज़ी नाम: Turpeth Root, Indian Jalap
वानस्पतिक नाम: Operculina turpethum (L.) Silva Manso
कुल (Family): Convolvulaceae

निशोथ (Operculina turpethum) आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण औषधीय लता है, जिसकी जड़ (Root) का औषधीय उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद में इसे विशेष रूप से विरेचक (Purgative), पित्त-कफ शामक, आमहर एवं शोधन (Detoxification) संबंधी औषधियों में महत्वपूर्ण माना गया है।

निशोथ का उल्लेख चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदय, भावप्रकाश निघण्टु, धन्वंतरि निघण्टु एवं भैषज्य रत्नावली सहित अनेक आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है। यह पंचकर्म, विशेषकर विरेचन कर्म में प्रयुक्त प्रमुख औषधियों में से एक है।

2. अन्य प्रचलित नाम

भाषा नाम
संस्कृत त्रिवृत, निशोथ, श्वेत त्रिवृत, श्यामा
हिंदी निशोथ, त्रिवृत
अंग्रेज़ी Turpeth Root, Indian Jalap
मराठी निशोत्तर
गुजराती નિસોતર
बंगाली ত্রিবৃত (Trivrit)
तमिल சிவதை (Sivathai)
तेलुगु తేగడ (Tegada)
कन्नड़ ತ್ರಿವೃತ್ (Trivrit)
मलयालम ത്രിവൃത്ത് (Trivrith)

3. पौधे का परिचय

निशोथ एक बहुवर्षीय आरोही (Climbing) लता है, जिसकी लंबाई 3–10 मीटर तक हो सकती है। इसकी पत्तियाँ हृदयाकार, फूल सफेद तथा फल गोलाकार होते हैं। औषधीय उपयोग के लिए इसकी मोटी, मांसल एवं सफेद या भूरे रंग की जड़ का उपयोग किया जाता है।

4. प्राकृतिक वितरण एवं खेती

  • मूल क्षेत्र: भारत एवं दक्षिण-पूर्व एशिया
  • भारत में वितरण: उत्तर भारत, मध्य भारत, पश्चिमी घाट एवं दक्षिण भारत
  • उपयुक्त जलवायु: उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय
  • तापमान: 20–35°C
  • मिट्टी: अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी

5. उपयोगी भाग (Parts Used)

  • जड़ (Root) – मुख्य औषधीय भाग
  • जड़ की छाल (Root Bark)

6. प्रमुख रासायनिक घटक (Active Constituents)

निशोथ की जड़ में निम्न प्रमुख जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं—

  • Turpethin (Resin Glycosides)
  • Operculinic Acid
  • Jalapin
  • Coumarins
  • Glycosides
  • Flavonoids
  • Resin Compounds
  • Starch

7. आयुर्वेदिक गुणधर्म

गुणधर्म विवरण
रस तिक्त, कटु, मधुर
गुण लघु, स्निग्ध
वीर्य उष्ण
विपाक मधुर
दोष प्रभाव पित्त एवं कफ शामक

8. पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोग

आयुर्वेद में निशोथ का उपयोग निम्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है—

  • विरेचन (Purgation) संबंधी आयुर्वेदिक योगों में
  • पंचकर्म चिकित्सा में
  • आमहर एवं शोधन संबंधी फॉर्मूलेशन में
  • पाचन समर्थन हेतु पारंपरिक योगों में
  • हर्बल चूर्ण एवं क्वाथ निर्माण में
  • बहु-हर्बल आयुर्वेदिक औषधियों में

9. संभावित स्वास्थ्य लाभ

1. आयुर्वेदिक शोधन (Detoxification)

निशोथ पंचकर्म में विरेचन कर्म हेतु पारंपरिक रूप से प्रयुक्त प्रमुख औषधियों में से एक है।

2. पाचन स्वास्थ्य का समर्थन

आयुर्वेद में इसका उपयोग कुछ पाचन संबंधी पारंपरिक योगों में किया जाता है।

3. कफ एवं पित्त संतुलन

आयुर्वेद के अनुसार निशोथ कफ एवं पित्त दोष के संतुलन में सहायक माना जाता है।

4. एंटीऑक्सीडेंट क्षमता

इसमें उपस्थित जैव सक्रिय यौगिक कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में सहायक हो सकते हैं।

5. आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन

निशोथ का उपयोग चूर्ण, क्वाथ, अवलेह एवं विभिन्न बहु-हर्बल आयुर्वेदिक उत्पादों में किया जाता है।

महत्वपूर्ण: उपरोक्त लाभ पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोगों एवं उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार, निदान या रोकथाम का दावा नहीं माना जाना चाहिए।

10. आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययन

Operculina turpethum पर उपलब्ध शोधों में निम्न संभावित गुणों का अध्ययन किया गया है—

  • Antioxidant Activity
  • Anti-inflammatory Activity
  • Hepatoprotective Potential
  • Gastroprotective Potential
  • Antimicrobial Activity
  • Phytochemical Analysis

इन संभावित प्रभावों की पुष्टि के लिए अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले मानव नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।

11. उपयोग की विधियाँ

  • निशोथ चूर्ण
  • क्वाथ (काढ़ा)
  • मानकीकृत अर्क (Standardized Extract)
  • आयुर्वेदिक कैप्सूल
  • बहु-हर्बल फॉर्मूलेशन
  • पंचकर्म चिकित्सा (विशेषज्ञ की देखरेख में)

12. सामान्य मात्रा

  • चूर्ण: 1–3 ग्राम प्रतिदिन (केवल चिकित्सकीय सलाह अनुसार)
  • काढ़ा: 30–50 मि.ली. (विशेषज्ञ के निर्देशानुसार)
  • अर्क (Extract): उत्पाद के निर्देशानुसार

नोट: निशोथ एक प्रभावशाली विरेचक औषधि है। इसका उपयोग केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक के निर्देशन में ही करें।

13. सावधानियाँ

  • केवल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपयोग करें।
  • गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान उपयोग न करें, जब तक विशेषज्ञ सलाह न दें।
  • दस्त, निर्जलीकरण (Dehydration) या गंभीर आंत्र विकार वाले व्यक्तियों में सावधानी आवश्यक है।
  • निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन न करें।
  • केवल प्रमाणित एवं शुद्ध गुणवत्ता वाले उत्पादों का उपयोग करें।

14. भंडारण

  • ठंडी एवं सूखी जगह पर रखें।
  • नमी एवं सीधी धूप से बचाएँ।
  • एयरटाइट कंटेनर में संग्रहित करें।

15. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

निशोथ का कौन-सा भाग औषधीय उपयोग में लिया जाता है?

मुख्य रूप से इसकी जड़ (Root) एवं जड़ की छाल का उपयोग किया जाता है।

क्या निशोथ पंचकर्म में उपयोग की जाती है?

हाँ। आयुर्वेद में यह विरेचन कर्म के लिए प्रमुख औषधियों में से एक मानी जाती है।

क्या निशोथ का नियमित सेवन किया जा सकता है?

नहीं। यह एक शक्तिशाली विरेचक औषधि है, इसलिए इसका नियमित सेवन केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह पर ही करना चाहिए।

क्या निशोथ पाचन स्वास्थ्य में उपयोगी है?

आयुर्वेद में इसका उपयोग कुछ पारंपरिक पाचन एवं शोधन संबंधी योगों में किया जाता है।

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निशोथ (Operculina turpethum) – फायदे, उपयोग, गुण एवं Botanical Name

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निशोथ (Operculina turpethum) की संपूर्ण जानकारी, आयुर्वेदिक गुण, सक्रिय घटक, पंचकर्म एवं विरेचन में पारंपरिक उपयोग, मात्रा, सावधानियाँ एवं FAQ।

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अस्वीकरण (Disclaimer)

यह जानकारी आयुर्वेदिक ग्रंथों, पारंपरिक उपयोगों तथा उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी रोग के निदान, उपचार, रोकथाम या चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। विशेष रूप से निशोथ एक प्रभावशाली विरेचक (Purgative) औषधि है, इसलिए इसका उपयोग केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह एवं निगरानी में ही किया जाना चाहिए। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि या हर्बल उत्पाद का उपयोग करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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