हिंदी नाम: अमलतास, आरग्वध, बंदरलाठी
संस्कृत नाम: आरग्वध, कृतमाल, व्याधिघात, सुवर्णक
अंग्रेज़ी नाम: Golden Shower Tree Pod, Indian Laburnum Pod, Amaltas Pod
वानस्पतिक नाम: Cassia fistula L.
कुल (Family): Fabaceae (Leguminosae)
अमलतास (Cassia fistula) आयुर्वेद की एक प्रसिद्ध एवं बहुपयोगी औषधीय वनस्पति है। इसे संस्कृत में "आरग्वध" कहा जाता है, जिसका अर्थ है रोगों का नाश करने वाला। इसकी लंबी बेलनाकार फली (Pod) औषधीय रूप से सबसे अधिक उपयोग की जाती है। फली के अंदर का काला, चिपचिपा गूदा (Fruit Pulp) आयुर्वेद में विशेष महत्व रखता है और इसे पारंपरिक रूप से पाचन स्वास्थ्य, मल त्याग की नियमितता, शरीर शोधन (Detoxification) तथा त्वचा स्वास्थ्य के समर्थन हेतु विभिन्न आयुर्वेदिक योगों में उपयोग किया जाता है।
| भाषा | नाम |
|---|---|
| संस्कृत | आरग्वध, कृतमाल, व्याधिघात |
| हिंदी | अमलतास |
| अंग्रेज़ी | Golden Shower Tree, Indian Laburnum |
| मराठी | बहावा |
| गुजराती | ગરમાળો (Garmalo) |
| बंगाली | সোনালু (Sonalu) |
| तमिल | கொன்றை (Kondrai) |
| तेलुगु | రేల (Rela) |
| कन्नड़ | ಕಕ್ಕೆ (Kakke) |
| मलयालम | കണിക്കൊന്ന (Kanikkonna) |
अमलतास एक मध्यम आकार का पर्णपाती वृक्ष है, जिसकी ऊँचाई लगभग 10–20 मीटर तक होती है। गर्मियों के मौसम में इस पर आकर्षक सुनहरे पीले फूलों के गुच्छे लगते हैं, जिसके कारण इसे Golden Shower Tree भी कहा जाता है। इसके फल लंबे, बेलनाकार, गहरे भूरे या काले रंग के होते हैं, जिनके भीतर मीठा, चिपचिपा काला गूदा एवं अनेक कठोर बीज पाए जाते हैं।
अमलतास की फली एवं गूदे में निम्न जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं:
| गुण-धर्म | विवरण |
|---|---|
| रस | मधुर |
| गुण | गुरु, मृदु |
| वीर्य | शीत |
| विपाक | मधुर |
| दोष प्रभाव | पित्त एवं वात शामक |
आयुर्वेद में अमलतास की फली का उपयोग निम्न स्थितियों में वर्णित है:
अमलतास का गूदा सामान्य पाचन क्रिया एवं आंतों की नियमित कार्यप्रणाली के समर्थन में पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है।
आयुर्वेद में इसे मृदु रेचक (Mild Laxative) माना गया है, जो सामान्य एवं नियमित मल त्याग को बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
अमलतास का उपयोग शरीर की प्राकृतिक शोधन प्रक्रियाओं के समर्थन हेतु विभिन्न आयुर्वेदिक योगों में किया जाता है।
रक्त एवं पाचन के संतुलन के माध्यम से त्वचा के सामान्य स्वास्थ्य के समर्थन हेतु पारंपरिक रूप से इसका उपयोग किया जाता है।
फ्लेवोनॉयड्स एवं पॉलीफेनॉल्स कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में सहायक हो सकते हैं।
कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में अमलतास के जैव सक्रिय घटकों में सूजन-रोधी गुणों की संभावना देखी गई है।
महत्वपूर्ण: उपरोक्त लाभ पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोगों एवं उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार, निदान या रोकथाम का दावा नहीं माना जाना चाहिए।
उपलब्ध शोधों में अमलतास के निम्न संभावित गुणों का अध्ययन किया गया है:
इन संभावित प्रभावों की पुष्टि के लिए और अधिक मानव नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।
हाँ। आयुर्वेद में फल के अंदर का काला गूदा सबसे अधिक औषधीय महत्व रखता है।
आयुर्वेद में इसे मृदु रेचक माना गया है और सामान्य मल त्याग के समर्थन हेतु पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है।
योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह एवं अनुशंसित मात्रा के अनुसार इसका सेवन किया जा सकता है।
आयुर्वेद में पाचन एवं रक्त संतुलन के माध्यम से त्वचा के सामान्य स्वास्थ्य के समर्थन हेतु इसका उपयोग किया जाता है।
यह जानकारी आयुर्वेदिक ग्रंथों, पारंपरिक उपयोगों तथा उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी रोग के निदान, उपचार, रोकथाम या चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।