हिंदी नाम: पाषाणभेद, पाषाणभेद, सिलफोड़ा
संस्कृत नाम: पाषाणभेद, अश्मभेद, उपलभेदक, शिलाभेद
अंग्रेज़ी नाम: Stone Breaker, Himalayan Bergenia, Rockfoil
वानस्पतिक नाम: Bergenia ligulata (Wall.) Engl. (Synonym: Bergenia ciliata var. ligulata)
कुल (Family): Saxifragaceae
पाषाणभेद (Bergenia ligulata) हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है। इसके प्रकंद (Rhizome) का मुख्य रूप से औषधीय उपयोग किया जाता है। बाज़ार में इसे सामान्यतः "पाषाणभेद जड़" कहा जाता है, यद्यपि वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से इसका उपयोगी भाग प्रकंद (Rhizome) है, न कि वास्तविक जड़ (True Root)।
आयुर्वेद में पाषाणभेद को मूत्रल (Diuretic), अश्मरीभेदक (पथरी संबंधी पारंपरिक उपयोग), शोथहर, कषाय एवं शीतल गुणों वाला माना गया है। इसका उल्लेख चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, भावप्रकाश निघण्टु, धन्वंतरि निघण्टु एवं भैषज्य रत्नावली सहित अनेक आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है।
| भाषा | नाम |
|---|---|
| संस्कृत | पाषाणभेद, अश्मभेद, उपलभेदक |
| हिंदी | पाषाणभेद, सिलफोड़ा |
| अंग्रेज़ी | Stone Breaker, Himalayan Bergenia |
| मराठी | पाषाणभेद |
| गुजराती | પાષાણભેદ |
| बंगाली | পাষাণভেদ (Pashanbhed) |
| तमिल | பாஷாணபேதம் |
| तेलुगु | పాషాణభేద |
| कन्नड़ | ಪಾಷಾಣಭೇದ |
| मलयालम | പാഷാണഭേദം |
पाषाणभेद एक बहुवर्षीय शाकीय पौधा है, जो मुख्यतः हिमालय के चट्टानी क्षेत्रों में उगता है। इसकी मोटी, रेंगने वाली भूरे रंग की प्रकंद (Rhizome) औषधीय रूप से सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। पत्तियाँ बड़ी, गोल एवं चमड़े जैसी होती हैं तथा फूल गुलाबी या हल्के बैंगनी रंग के होते हैं।
पाषाणभेद के प्रकंद में निम्न प्रमुख जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं—
| गुणधर्म | विवरण |
|---|---|
| रस | तिक्त, कषाय |
| गुण | लघु |
| वीर्य | शीत |
| विपाक | कटु |
| दोष प्रभाव | पित्त एवं कफ शामक |
आयुर्वेद में पाषाणभेद का उपयोग निम्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है—
आयुर्वेद में पाषाणभेद का उपयोग मूत्र प्रणाली के सामान्य स्वास्थ्य को बनाए रखने वाले पारंपरिक योगों में किया जाता है।
आयुर्वेद में इसे अश्मरी (मूत्र पथरी) संबंधी पारंपरिक फॉर्मूलेशन में एक प्रमुख औषधि माना गया है।
यह पारंपरिक रूप से मूत्र प्रवाह के समर्थन हेतु उपयोग की जाने वाली औषधियों में शामिल है।
इसमें उपस्थित Bergenin एवं अन्य फिनोलिक यौगिक कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में सहायक हो सकते हैं।
आयुर्वेद में इसका उपयोग सूजन संबंधी कुछ पारंपरिक योगों में भी किया जाता है।
महत्वपूर्ण: उपरोक्त लाभ पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोगों एवं उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार, निदान या रोकथाम का दावा नहीं माना जाना चाहिए।
Bergenia ligulata पर उपलब्ध शोधों में निम्न संभावित गुणों का अध्ययन किया गया है—
इन संभावित प्रभावों की पुष्टि के लिए अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले मानव नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।
मुख्य रूप से इसका प्रकंद (Rhizome) उपयोग किया जाता है, जिसे बाज़ार में प्रायः "Root" के नाम से बेचा जाता है।
हाँ। इसका उपयोग मूत्र स्वास्थ्य एवं मूत्रल गुणों वाले पारंपरिक आयुर्वेदिक योगों में किया जाता है।
हाँ। आयुर्वेद में इसे अश्मरी (मूत्र पथरी) संबंधी पारंपरिक फॉर्मूलेशन की प्रमुख औषधियों में माना गया है।
Bergenin इसका प्रमुख जैव सक्रिय यौगिक माना जाता है।
पाषाणभेद (Bergenia ligulata) – फायदे, उपयोग, गुण एवं Botanical Name
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यह जानकारी आयुर्वेदिक ग्रंथों, पारंपरिक उपयोगों तथा उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी रोग के निदान, उपचार, रोकथाम या चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि, हर्बल सप्लीमेंट या प्राकृतिक उत्पाद का उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।