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Punarnava Root (Boerhavia diffusa)

Code: HR-013

 

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पुनर्नवा जड़ (Punarnava Root)

1. सामान्य परिचय

हिंदी नाम: पुनर्नवा, लाल पुनर्नवा, सफेद पुनर्नवा
संस्कृत नाम: पुनर्नवा, वर्षाभू, शोथघ्नी, श्वेतपुनर्नवा, रक्तपुनर्नवा
अंग्रेज़ी नाम: Punarnava Root, Spreading Hogweed Root, Red Spiderling Root
वानस्पतिक नाम: Boerhavia diffusa L.
कुल (Family): Nyctaginaceae

पुनर्नवा (Boerhavia diffusa) आयुर्वेद की एक अत्यंत महत्वपूर्ण रसायन (Rasayana) औषधि है। इसकी जड़ (Root) सबसे अधिक औषधीय महत्व रखती है और आयुर्वेदिक औषधियों में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। "पुनर्नवा" का अर्थ है "जो शरीर को पुनः नया बना दे", इसलिए इसे शरीर के संतुलन एवं पुनरुत्थान (Rejuvenation) में सहायक माना गया है।

आयुर्वेद में पुनर्नवा की जड़ को मूत्रल (Diuretic), शोथहर (Anti-inflammatory), यकृत हितकारी, रसायन, कफ-वात शामक एवं मेदोहर गुणों वाली औषधि माना गया है। इसका उल्लेख चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदय, भावप्रकाश निघण्टु, धन्वंतरि निघण्टु एवं भैषज्य रत्नावली सहित अनेक आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है।

2. अन्य प्रचलित नाम

भाषा नाम
संस्कृत पुनर्नवा, वर्षाभू, शोथघ्नी
हिंदी पुनर्नवा
अंग्रेज़ी Punarnava Root, Spreading Hogweed
मराठी पुनर्नवा
गुजराती સાટોડી (Satodi)
बंगाली পুনর্ণবা (Punarnava)
तमिल மூக்கிரட்டை (Mookkirattai)
तेलुगु అటుక మామిడి (Atikamamidi)
कन्नड़ ಕೋಮೆಗಿಡ (Komme Gida)
मलयालम തഴുതാമ (Thazhuthama)

3. पौधे का परिचय

पुनर्नवा एक बहुवर्षीय, भूमि पर फैलने वाली औषधीय वनस्पति है। इसकी जड़ मोटी, बेलनाकार एवं हल्के भूरे रंग की होती है। आयुर्वेदिक औषधियों में मुख्यतः जड़ का उपयोग चूर्ण, क्वाथ, अर्क एवं बहु-हर्बल फॉर्मूलेशन के रूप में किया जाता है।

4. प्राकृतिक वितरण एवं खेती

  • मूल क्षेत्र: भारत एवं उष्णकटिबंधीय एशिया
  • भारत में वितरण: सम्पूर्ण भारत
  • उपयुक्त जलवायु: उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय
  • तापमान: 20–35°C
  • मिट्टी: दोमट, बलुई दोमट एवं अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी

5. उपयोगी भाग (Parts Used)

  • जड़ (Root) – मुख्य औषधीय भाग
  • पत्तियाँ (Leaves)
  • तना (Stem)
  • संपूर्ण पंचांग (Whole Plant)

6. प्रमुख रासायनिक घटक (Active Constituents)

पुनर्नवा की जड़ में निम्न प्रमुख जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं—

  • Punarnavine
  • Boeravinones (A–F)
  • Liriodendrin
  • Boerhavic Acid
  • Ursolic Acid
  • β-Sitosterol
  • Flavonoids
  • Alkaloids
  • Phenolic Compounds

7. आयुर्वेदिक गुणधर्म

गुणधर्म विवरण
रस तिक्त, कषाय, मधुर
गुण लघु, रुक्ष
वीर्य उष्ण
विपाक मधुर
दोष प्रभाव कफ एवं वात शामक

8. पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोग

आयुर्वेद में पुनर्नवा की जड़ का उपयोग निम्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है—

  • मूत्र स्वास्थ्य संबंधी पारंपरिक योगों में
  • शोथ (सूजन) संबंधी आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन में
  • यकृत (Liver) स्वास्थ्य समर्थन हेतु
  • वृक्क (Kidney) स्वास्थ्य संबंधी पारंपरिक योगों में
  • रसायन (Rasayana) चिकित्सा में
  • हर्बल चूर्ण, क्वाथ एवं अर्क निर्माण में

9. संभावित स्वास्थ्य लाभ

1. मूत्र स्वास्थ्य का समर्थन

आयुर्वेद में पुनर्नवा की जड़ का उपयोग मूत्र प्रणाली के सामान्य स्वास्थ्य एवं मूत्रल गुणों के लिए किया जाता है।

2. यकृत (Liver) स्वास्थ्य

पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसका उपयोग यकृत के सामान्य कार्य एवं स्वास्थ्य के समर्थन हेतु किया जाता है।

3. वृक्क (Kidney) स्वास्थ्य

पुनर्नवा की जड़ विभिन्न पारंपरिक आयुर्वेदिक योगों में वृक्क स्वास्थ्य के समर्थन के लिए प्रयुक्त होती है।

4. शोथ (सूजन) संबंधी उपयोग

आयुर्वेद में इसे शोथहर औषधि माना गया है और सूजन संबंधी पारंपरिक फॉर्मूलेशन में उपयोग किया जाता है।

5. एंटीऑक्सीडेंट गुण

इसमें उपस्थित फ्लेवोनॉयड्स एवं फिनोलिक यौगिक कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में सहायक हो सकते हैं।

महत्वपूर्ण: उपरोक्त लाभ पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोगों एवं उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार, निदान या रोकथाम का दावा नहीं माना जाना चाहिए।

10. आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययन

Boerhavia diffusa की जड़ पर उपलब्ध शोधों में निम्न संभावित गुणों का अध्ययन किया गया है—

  • Diuretic Activity
  • Nephroprotective Activity
  • Hepatoprotective Activity
  • Anti-inflammatory Activity
  • Antioxidant Activity
  • Immunomodulatory Activity
  • Phytochemical Analysis

इन संभावित प्रभावों की पुष्टि के लिए अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले मानव नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।

11. उपयोग की विधियाँ

  • पुनर्नवा जड़ चूर्ण
  • क्वाथ (काढ़ा)
  • मानकीकृत अर्क (Standardized Extract)
  • हर्बल कैप्सूल
  • बहु-हर्बल आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन

12. सामान्य मात्रा

  • चूर्ण: 3–6 ग्राम प्रतिदिन (चिकित्सकीय सलाह अनुसार)
  • काढ़ा: 30–50 मि.ली.
  • अर्क (Extract): उत्पाद के निर्देशानुसार

13. सावधानियाँ

  • चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही उपयोग करें।
  • गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान उपयोग से पहले विशेषज्ञ से परामर्श लें।
  • यदि आप मूत्रवर्धक (Diuretic) दवाओं का सेवन कर रहे हैं, तो चिकित्सक से सलाह लें।
  • निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन न करें।
  • केवल प्रमाणित एवं शुद्ध गुणवत्ता वाले उत्पादों का उपयोग करें।

14. भंडारण

  • ठंडी एवं सूखी जगह पर रखें।
  • नमी एवं सीधी धूप से बचाएँ।
  • एयरटाइट कंटेनर में संग्रहित करें।

15. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

पुनर्नवा का सबसे अधिक औषधीय भाग कौन-सा है?

जड़ (Root) को आयुर्वेद में सबसे अधिक औषधीय महत्व दिया गया है, हालांकि पत्तियाँ एवं संपूर्ण पंचांग भी उपयोगी हैं।

क्या पुनर्नवा की जड़ मूत्र स्वास्थ्य के लिए उपयोग की जाती है?

हाँ। आयुर्वेद में इसका उपयोग मूत्र स्वास्थ्य एवं मूत्रल गुणों वाले पारंपरिक योगों में किया जाता है।

क्या पुनर्नवा की जड़ यकृत एवं वृक्क स्वास्थ्य के लिए उपयोगी मानी जाती है?

हाँ। पारंपरिक आयुर्वेद में इसका उपयोग यकृत एवं वृक्क स्वास्थ्य के समर्थन हेतु विभिन्न योगों में किया जाता है।

पुनर्नवा का प्रमुख सक्रिय घटक कौन-सा है?

Punarnavine एवं Boeravinones इसके प्रमुख जैव सक्रिय यौगिक माने जाते हैं।

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पुनर्नवा जड़ (Boerhavia diffusa) – फायदे, उपयोग, गुण एवं Botanical Name

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अस्वीकरण (Disclaimer)

यह जानकारी आयुर्वेदिक ग्रंथों, पारंपरिक उपयोगों तथा उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी रोग के निदान, उपचार, रोकथाम या चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि, हर्बल सप्लीमेंट या प्राकृतिक उत्पाद का उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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