हिंदी नाम: पिप्पली मूल, पीपलामूल, लंबी मिर्च की जड़
संस्कृत नाम: पिप्पलीमूल, मागधीमूल, कृष्णा, पिप्पलीमूलम्
अंग्रेज़ी नाम: Long Pepper Root, Indian Long Pepper Root
वानस्पतिक नाम: Piper longum L.
कुल (Family): Piperaceae
पिप्पली मूल (Piper longum) की जड़ आयुर्वेद की अत्यंत महत्वपूर्ण औषधियों में से एक है। यद्यपि पिप्पली के फल (Long Pepper Fruit) अधिक प्रसिद्ध हैं, लेकिन इसकी जड़ (Root) का भी औषधीय दृष्टि से विशेष महत्व है। आयुर्वेद में पिप्पली मूल को दीपन (भूख बढ़ाने वाला), पाचनवर्धक, वात-कफहर, श्वास-कासहर, आमपाचक एवं रसायन गुणों के लिए जाना जाता है।
पिप्पली मूल का उल्लेख चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदय, भावप्रकाश निघण्टु, धन्वंतरि निघण्टु एवं भैषज्य रत्नावली सहित अनेक आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है। यह प्रसिद्ध त्रिकटु चूर्ण तथा कई पारंपरिक आयुर्वेदिक योगों का महत्वपूर्ण घटक है।
| भाषा | नाम |
|---|---|
| संस्कृत | पिप्पलीमूल, मागधीमूल |
| हिंदी | पिप्पली मूल, पीपलामूल |
| अंग्रेज़ी | Long Pepper Root |
| मराठी | पिंपळीमूळ |
| गुजराती | પીપરીમૂળ |
| बंगाली | পিপুলমূল |
| तमिल | திப்பிலி வேர் (Thippili Ver) |
| तेलुगु | పిప్పలి వేరు |
| कन्नड़ | ಹಿಪ್ಪಲಿ ಬೇರು |
| मलयालम | തിപ്പലി വേര് |
Piper longum एक बहुवर्षीय आरोही (Climbing) लता है। इसकी जड़ शाखायुक्त, हल्के भूरे रंग की एवं सुगंधित होती है। फल, जड़ एवं तना तीनों का आयुर्वेद में औषधीय उपयोग किया जाता है, लेकिन पिप्पली मूल विशेष रूप से पाचन एवं श्वसन स्वास्थ्य संबंधी पारंपरिक योगों में प्रयुक्त होती है।
पिप्पली मूल में निम्न प्रमुख जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं—
| गुणधर्म | विवरण |
|---|---|
| रस | कटु |
| गुण | लघु, स्निग्ध, तीक्ष्ण |
| वीर्य | उष्ण |
| विपाक | मधुर |
| दोष प्रभाव | वात एवं कफ शामक (अधिक मात्रा में पित्त बढ़ा सकती है) |
आयुर्वेद में पिप्पली मूल का उपयोग निम्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है—
आयुर्वेद में पिप्पली मूल को भूख एवं पाचन अग्नि के समर्थन के लिए उपयोग किया जाता है।
पारंपरिक रूप से इसका उपयोग श्वसन तंत्र के सामान्य स्वास्थ्य के समर्थन हेतु विभिन्न आयुर्वेदिक योगों में किया जाता है।
पिप्पली मूल वात एवं कफ दोष के संतुलन हेतु प्रयुक्त प्रमुख औषधियों में से एक है।
पिपेरिन (Piperine) कुछ पोषक तत्वों एवं हर्बल घटकों की जैवउपलब्धता बढ़ाने में सहायक हो सकता है, इसलिए इसे अनेक आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन में सम्मिलित किया जाता है।
इसमें उपस्थित एल्कलॉइड एवं फिनोलिक यौगिक कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में सहायक हो सकते हैं।
महत्वपूर्ण: उपरोक्त लाभ पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोगों एवं उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार, निदान या रोकथाम का दावा नहीं माना जाना चाहिए।
Piper longum की जड़ पर उपलब्ध शोधों में निम्न संभावित गुणों का अध्ययन किया गया है—
इन संभावित प्रभावों की पुष्टि के लिए अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले मानव नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।
पिप्पली पौधे का फल है, जबकि पिप्पली मूल उसी पौधे की जड़ है। दोनों के गुणों में समानता होने पर भी आयुर्वेद में इनके उपयोग अलग-अलग योगों में किए जाते हैं।
नहीं। पारंपरिक त्रिकटु चूर्ण में पिप्पली का फल, काली मिर्च और सोंठ होती है। पिप्पली मूल का उपयोग अन्य आयुर्वेदिक योगों में किया जाता है।
Piperine तथा Piperlongumine इसके प्रमुख जैव सक्रिय यौगिक हैं।
हाँ। आयुर्वेद में इसका उपयोग पाचन अग्नि एवं श्वसन स्वास्थ्य के समर्थन हेतु पारंपरिक रूप से किया जाता है।
पिप्पली मूल (Piper longum) – फायदे, उपयोग, गुण एवं Botanical Name
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यह जानकारी आयुर्वेदिक ग्रंथों, पारंपरिक उपयोगों तथा उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी रोग के निदान, उपचार, रोकथाम या चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि, हर्बल सप्लीमेंट या प्राकृतिक उत्पाद का उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।