product-image-front
product-image-2
product-image-3

Chitrak Root Powder (Plumbago zeylanica)

Code: HRP-010

 

4.50

240

300.00

/

100gm

20% OFF


Add Short Intro

चित्रक जड़ (Chitrak Root)

सामान्य परिचय

हिंदी नाम: चित्रक, सफेद चित्रक, चित्रक जड़
संस्कृत नाम: चित्रक, अग्नि, वह्नि, दहन, पावक, श्वेतचित्रक
अंग्रेज़ी नाम: White Leadwort Root, Ceylon Leadwort Root
वानस्पतिक नाम: Plumbago zeylanica L.
कुल (Family): Plumbaginaceae

चित्रक (Plumbago zeylanica) आयुर्वेद की अत्यंत प्रसिद्ध एवं शक्तिशाली औषधियों में से एक है। इसकी जड़ (Root) को औषधीय रूप से सबसे अधिक उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद में चित्रक को दीपन (भूख बढ़ाने वाला), पाचनवर्धक, आमपाचक, वात-कफ शामक एवं अग्निदीपक औषधि माना गया है।

चित्रक का उल्लेख चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदय, भावप्रकाश निघण्टु, धन्वंतरि निघण्टु एवं राज निघण्टु जैसे प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है। यह अनेक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक योगों जैसे चित्रकादि वटी, चित्रक हरितकी, पंचकोल चूर्ण एवं अग्निवर्धक फॉर्मूलेशन का प्रमुख घटक है।

महत्वपूर्ण: चित्रक एक तीक्ष्ण (Potent) औषधि है। इसका उपयोग हमेशा अनुशंसित मात्रा एवं योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक के मार्गदर्शन में करना चाहिए।

अन्य प्रचलित नाम

भाषा नाम
संस्कृत चित्रक, अग्नि, वह्नि, श्वेतचित्रक
हिंदी चित्रक
अंग्रेज़ी White Leadwort, Ceylon Leadwort
मराठी चित्रक
गुजराती ચિત્રક
बंगाली চিত্রা (Chitra)
तमिल சித்திரமூலம் (Chithramoolam)
तेलुगु చిత్రమూలం (Chitramoolam)
कन्नड़ ಚಿತ್ರಮೂಲ (Chitramoola)
मलयालम ചിത്രമൂലം (Chithramoolam)

पौधे का परिचय

चित्रक एक बहुवर्षीय झाड़ीदार पौधा है, जिसकी ऊँचाई लगभग 1–1.5 मीटर तक होती है। इसकी पत्तियाँ हरी एवं अंडाकार होती हैं तथा सफेद रंग के सुंदर फूल आते हैं। इसकी मोटी, बेलनाकार जड़ औषधीय रूप से सबसे अधिक उपयोगी मानी जाती है।

 

प्रमुख रासायनिक घटक (Active Constituents)

चित्रक की जड़ में निम्न प्रमुख जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं—

  • Plumbagin
  • Chitranone
  • Zeylanone
  • Sitosterol
  • Flavonoids
  • Tannins
  • Naphthoquinones
  • Phenolic Compounds

आयुर्वेदिक गुण-धर्म

गुण-धर्म विवरण
रस कटु
गुण लघु, तीक्ष्ण, रुक्ष
वीर्य उष्ण
विपाक कटु
दोष प्रभाव वात एवं कफ शामक (अधिक मात्रा में पित्त बढ़ा सकता है)

पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोग

आयुर्वेद में चित्रक जड़ का उपयोग निम्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है—

  • अग्नि (Digestive Fire) को प्रोत्साहित करने वाले योगों में
  • पाचन एवं आमपाचन संबंधी फॉर्मूलेशन में
  • वात-कफ संतुलन हेतु
  • भूख बढ़ाने वाले (दीपन) योगों में
  • पंचकोल एवं चित्रकादि योगों में
  • पारंपरिक आयुर्वेदिक चूर्ण एवं वटी निर्माण में

संभावित स्वास्थ्य लाभ

1. पाचन स्वास्थ्य का समर्थन

चित्रक आयुर्वेद में अग्निदीपक एवं पाचनवर्धक औषधि के रूप में प्रसिद्ध है और सामान्य पाचन क्रिया के समर्थन हेतु उपयोग किया जाता है।

2. भूख बढ़ाने में सहायक

इसका उपयोग पारंपरिक रूप से भूख की कमी (मंदाग्नि) से संबंधित आयुर्वेदिक योगों में किया जाता है।

3. वात-कफ संतुलन

आयुर्वेद के अनुसार चित्रक वात एवं कफ दोष के संतुलन में सहायक माना जाता है।

4. एंटीऑक्सीडेंट गुण

इसमें उपस्थित प्लम्बाजिन (Plumbagin) एवं अन्य जैव सक्रिय यौगिकों पर एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए अध्ययन किए गए हैं।

5. आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन

चित्रक जड़ अनेक पारंपरिक आयुर्वेदिक चूर्ण, वटी, अवलेह एवं क्वाथ में प्रमुख घटक के रूप में उपयोग की जाती है।

महत्वपूर्ण: उपरोक्त लाभ पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोगों एवं उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार, निदान या रोकथाम का दावा नहीं माना जाना चाहिए।

आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययन

Plumbago zeylanica पर उपलब्ध शोधों में निम्न संभावित गुणों का अध्ययन किया गया है—

  • Antioxidant Activity
  • Anti-inflammatory Activity
  • Antimicrobial Activity
  • Digestive Support Potential
  • Hepatoprotective Potential
  • Phytochemical Analysis

इन संभावित प्रभावों की पुष्टि के लिए अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले मानव नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।

सामान्य मात्रा

  • चूर्ण: 250 मि.ग्रा. से 1 ग्राम प्रतिदिन (या चिकित्सकीय सलाह अनुसार)
  • काढ़ा: 20–40 मि.ली.
  • अर्क (Extract): उत्पाद के निर्देशानुसार

नोट: चित्रक तीक्ष्ण प्रकृति की औषधि है, इसलिए इसकी मात्रा सामान्य जड़ी-बूटियों की तुलना में कम रखी जाती है।

सावधानियाँ

  • चित्रक का उपयोग केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से करें।
  • गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान उपयोग न करें, जब तक चिकित्सक सलाह न दें।
  • अधिक मात्रा में सेवन से पेट में जलन, मुँह में जलन या अन्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
  • अल्सर, अत्यधिक अम्लता या संवेदनशील पाचन तंत्र वाले व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

भंडारण

  • ठंडी एवं सूखी जगह पर रखें।
  • नमी एवं सीधी धूप से बचाएँ।
  • एयरटाइट कंटेनर में संग्रहित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

चित्रक का कौन-सा भाग सबसे अधिक उपयोग किया जाता है?

मुख्य रूप से इसकी जड़ (Root) औषधीय उपयोग में ली जाती है।

क्या चित्रक पाचन स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है?

हाँ। आयुर्वेद में इसे अग्निदीपक एवं पाचनवर्धक औषधि माना गया है।

क्या चित्रक का सेवन सभी लोग कर सकते हैं?

नहीं। यह तीक्ष्ण औषधि है, इसलिए गर्भवती महिलाओं, अल्सर के रोगियों एवं संवेदनशील व्यक्तियों को बिना चिकित्सकीय सलाह इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।

क्या चित्रक आधुनिक आयुर्वेदिक उत्पादों में उपयोग किया जाता है?

हाँ। इसका उपयोग अनेक आयुर्वेदिक चूर्ण, वटी, कैप्सूल एवं पाचन संबंधी हर्बल फॉर्मूलेशन में किया जाता है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह जानकारी आयुर्वेदिक ग्रंथों, पारंपरिक उपयोगों तथा उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी रोग के निदान, उपचार, रोकथाम या चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। चित्रक एक तीक्ष्ण एवं प्रभावशाली आयुर्वेदिक औषधि है, इसलिए इसका उपयोग केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक के मार्गदर्शन में ही करें।

ERROR:

X

WARNING:

X

ALERT:

X

NOTIFICATION:

X