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Pashanbhed Root Powder (Bergenia ligulata)

Code: HRP-011

 

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पाषाणभेद जड़ (Pashanbhed Root)

1. सामान्य परिचय

हिंदी नाम: पाषाणभेद, पाषाणभेद, सिलफोड़ा
संस्कृत नाम: पाषाणभेद, अश्मभेद, उपलभेदक, शिलाभेद
अंग्रेज़ी नाम: Stone Breaker, Himalayan Bergenia, Rockfoil
वानस्पतिक नाम: Bergenia ligulata (Wall.) Engl. (Synonym: Bergenia ciliata var. ligulata)
कुल (Family): Saxifragaceae

पाषाणभेद (Bergenia ligulata) हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है। इसके प्रकंद (Rhizome) का मुख्य रूप से औषधीय उपयोग किया जाता है। बाज़ार में इसे सामान्यतः "पाषाणभेद जड़" कहा जाता है, यद्यपि वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से इसका उपयोगी भाग प्रकंद (Rhizome) है, न कि वास्तविक जड़ (True Root)।

आयुर्वेद में पाषाणभेद को मूत्रल (Diuretic), अश्मरीभेदक (पथरी संबंधी पारंपरिक उपयोग), शोथहर, कषाय एवं शीतल गुणों वाला माना गया है। इसका उल्लेख चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, भावप्रकाश निघण्टु, धन्वंतरि निघण्टु एवं भैषज्य रत्नावली सहित अनेक आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है।

2. अन्य प्रचलित नाम

भाषा नाम
संस्कृत पाषाणभेद, अश्मभेद, उपलभेदक
हिंदी पाषाणभेद, सिलफोड़ा
अंग्रेज़ी Stone Breaker, Himalayan Bergenia
मराठी पाषाणभेद
गुजराती પાષાણભેદ
बंगाली পাষাণভেদ (Pashanbhed)
तमिल பாஷாணபேதம்
तेलुगु పాషాణభేద
कन्नड़ ಪಾಷಾಣಭೇದ
मलयालम പാഷാണഭേദം

3. पौधे का परिचय

पाषाणभेद एक बहुवर्षीय शाकीय पौधा है, जो मुख्यतः हिमालय के चट्टानी क्षेत्रों में उगता है। इसकी मोटी, रेंगने वाली भूरे रंग की प्रकंद (Rhizome) औषधीय रूप से सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। पत्तियाँ बड़ी, गोल एवं चमड़े जैसी होती हैं तथा फूल गुलाबी या हल्के बैंगनी रंग के होते हैं।

4. प्राकृतिक वितरण एवं खेती

  • मूल क्षेत्र: हिमालय
  • भारत में वितरण: जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम एवं पूर्वोत्तर हिमालय
  • ऊँचाई: लगभग 1,800–4,500 मीटर
  • उपयुक्त जलवायु: शीतोष्ण
  • मिट्टी: जैविक पदार्थों से भरपूर, अच्छी जल निकासी वाली चट्टानी मिट्टी

5. उपयोगी भाग (Parts Used)

  • प्रकंद (Rhizome) – मुख्य औषधीय भाग (व्यापार में "Root" के नाम से भी बेचा जाता है)

6. प्रमुख रासायनिक घटक (Active Constituents)

पाषाणभेद के प्रकंद में निम्न प्रमुख जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं—

  • Bergenin
  • Afzelechin
  • Gallic Acid
  • Catechin
  • Arbutin
  • Tannins
  • Flavonoids
  • Phenolic Compounds

7. आयुर्वेदिक गुणधर्म

गुणधर्म विवरण
रस तिक्त, कषाय
गुण लघु
वीर्य शीत
विपाक कटु
दोष प्रभाव पित्त एवं कफ शामक

8. पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोग

आयुर्वेद में पाषाणभेद का उपयोग निम्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है—

  • मूत्र स्वास्थ्य संबंधी पारंपरिक आयुर्वेदिक योगों में
  • अश्मरी (मूत्र पथरी) संबंधी पारंपरिक फॉर्मूलेशन में
  • मूत्रल (Diuretic) योगों में
  • शोथहर (सूजन संबंधी) योगों में
  • हर्बल चूर्ण, क्वाथ एवं अर्क निर्माण में
  • बहु-हर्बल आयुर्वेदिक औषधियों में

9. संभावित स्वास्थ्य लाभ

1. मूत्र स्वास्थ्य का समर्थन

आयुर्वेद में पाषाणभेद का उपयोग मूत्र प्रणाली के सामान्य स्वास्थ्य को बनाए रखने वाले पारंपरिक योगों में किया जाता है।

2. पथरी संबंधी पारंपरिक उपयोग

आयुर्वेद में इसे अश्मरी (मूत्र पथरी) संबंधी पारंपरिक फॉर्मूलेशन में एक प्रमुख औषधि माना गया है।

3. मूत्रल (Diuretic) गुण

यह पारंपरिक रूप से मूत्र प्रवाह के समर्थन हेतु उपयोग की जाने वाली औषधियों में शामिल है।

4. एंटीऑक्सीडेंट गुण

इसमें उपस्थित Bergenin एवं अन्य फिनोलिक यौगिक कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में सहायक हो सकते हैं।

5. शोथ (सूजन) संबंधी पारंपरिक उपयोग

आयुर्वेद में इसका उपयोग सूजन संबंधी कुछ पारंपरिक योगों में भी किया जाता है।

महत्वपूर्ण: उपरोक्त लाभ पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोगों एवं उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी रोग के उपचार, निदान या रोकथाम का दावा नहीं माना जाना चाहिए।

10. आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययन

Bergenia ligulata पर उपलब्ध शोधों में निम्न संभावित गुणों का अध्ययन किया गया है—

  • Antiurolithiatic Potential
  • Diuretic Activity
  • Antioxidant Activity
  • Anti-inflammatory Activity
  • Antimicrobial Activity
  • Nephroprotective Potential
  • Phytochemical Analysis

इन संभावित प्रभावों की पुष्टि के लिए अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले मानव नैदानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।

11. उपयोग की विधियाँ

  • पाषाणभेद चूर्ण
  • क्वाथ (काढ़ा)
  • मानकीकृत अर्क (Standardized Extract)
  • हर्बल कैप्सूल
  • बहु-हर्बल आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन

12. सामान्य मात्रा

  • चूर्ण: 3–6 ग्राम प्रतिदिन (चिकित्सकीय सलाह अनुसार)
  • काढ़ा: 30–50 मि.ली.
  • अर्क (Extract): उत्पाद के निर्देशानुसार

13. सावधानियाँ

  • चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही उपयोग करें।
  • गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान उपयोग से पहले विशेषज्ञ से परामर्श लें।
  • गंभीर गुर्दा रोग वाले व्यक्ति चिकित्सकीय सलाह के बिना उपयोग न करें।
  • निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन न करें।
  • केवल प्रमाणित एवं शुद्ध गुणवत्ता वाले उत्पादों का उपयोग करें।

14. भंडारण

  • ठंडी एवं सूखी जगह पर रखें।
  • नमी एवं सीधी धूप से बचाएँ।
  • एयरटाइट कंटेनर में संग्रहित करें।

15. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

पाषाणभेद का कौन-सा भाग औषधीय उपयोग में लिया जाता है?

मुख्य रूप से इसका प्रकंद (Rhizome) उपयोग किया जाता है, जिसे बाज़ार में प्रायः "Root" के नाम से बेचा जाता है।

क्या पाषाणभेद का उपयोग आयुर्वेद में मूत्र स्वास्थ्य के लिए किया जाता है?

हाँ। इसका उपयोग मूत्र स्वास्थ्य एवं मूत्रल गुणों वाले पारंपरिक आयुर्वेदिक योगों में किया जाता है।

क्या पाषाणभेद पथरी संबंधी आयुर्वेदिक योगों में प्रयुक्त होता है?

हाँ। आयुर्वेद में इसे अश्मरी (मूत्र पथरी) संबंधी पारंपरिक फॉर्मूलेशन की प्रमुख औषधियों में माना गया है।

पाषाणभेद का प्रमुख सक्रिय घटक कौन-सा है?

Bergenin इसका प्रमुख जैव सक्रिय यौगिक माना जाता है।

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अस्वीकरण (Disclaimer)

यह जानकारी आयुर्वेदिक ग्रंथों, पारंपरिक उपयोगों तथा उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर केवल शैक्षणिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी रोग के निदान, उपचार, रोकथाम या चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि, हर्बल सप्लीमेंट या प्राकृतिक उत्पाद का उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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